मेरा भइया
झगड़े वाला प्यार निराला,
भाई बहन में होता है
मेरा भी जो भइया है
हरदम मुझसे लड़ता है
साथ में खाता छीन झपट के,
युद्ध खेल में करता है
गला दवाता, बाल खींचता,
पर साथ में रहता है
अपने मन की मुझसे कहता,
मेरी बातें सुनता है
उससे प्यार मैं करती हूँ,
पर थोड़ा सा जलती हूँ
माँ जब उसको प्यार करे तो,
फ़ौरन गुस्सा करती हूँ
घर में उसको डाँट पड़े तो
में ही पहले रोती हूँ
उसके लिये मैं लड़ती हूँ और
उससे भी में लड़ती हूँ
तरह-तरह का भोज बनाती
फिर भी मुँह बनाता है
थप्पड़ खाकर भी न सुनता,
ठूंसकर खाना खिलाती में
मेरी गलती पर भी देखो,
वह औरों से लड़ता है
मेरे पैर दवाता है और मुझको ही सताता है
लड़ता है, मारता है,
खट्टा-मीठा रिश्ता है
दुश्मन है, पर दोस्त है पक्का
लाड़ला मेरा भइया है ।
रुचि शुक्ला
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