"धारा का सफर" 1990 से 2004 के दौरान मेरे द्वारा लिखी गई कविताओं का संग्रह है। इसमें 13 वर्ष की बालिका की नादान कविताओं के साथ-साथ एक युवा दृष्टि की झलक भी देखने को मिलेती है। "कुछ कर प्रयास चलने का, दो कदम मात्र बढ़ाए हैं, एक राह दृष्टि मंज़िल की है, कुछ स्वप्न नेत्र छलकाए हैं।" धारा की इस लहर में पाठक स्वयं ही बह चलें इसी आशा के साथ, रूचि शुक्ला
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