रहस्य
बाज़ार की सजावटों
में ये निर्जीवता कैसी ?
हर शख्स की भीड़ में
तन्हाइयत कैसी ?
अबसादी सोच की ये,
लाचारी कैसी ?
आत्मा का खेल क्यों ?
बुद्धि और अहसास क्यों ?
काम से थकान क्यों ?
हार और जीत क्यों ?
'क्यों' के उठे हैं
आज ये सवाल क्यों ?
मंच पर मेरा हिस्सा कहाँ है
वजह इस खोज की
नहीं निर्वजह है
वेदों में छिपे हैं कई राज़ गहरे
गूढ़ता है इतनी
न बुद्धि में ठहरे
निरुत्तरित, अवाक नहीं मैं अकेली
चक्कर में इसके सभी तो फंसे हैं ।
रुचि शुक्ला
बाज़ार की सजावटों
में ये निर्जीवता कैसी ?
हर शख्स की भीड़ में
तन्हाइयत कैसी ?
अबसादी सोच की ये,
लाचारी कैसी ?
आत्मा का खेल क्यों ?
बुद्धि और अहसास क्यों ?
काम से थकान क्यों ?
हार और जीत क्यों ?
'क्यों' के उठे हैं
आज ये सवाल क्यों ?
मंच पर मेरा हिस्सा कहाँ है
वजह इस खोज की
नहीं निर्वजह है
वेदों में छिपे हैं कई राज़ गहरे
गूढ़ता है इतनी
न बुद्धि में ठहरे
निरुत्तरित, अवाक नहीं मैं अकेली
चक्कर में इसके सभी तो फंसे हैं ।
रुचि शुक्ला
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