आमलाल बेइमानी
हम हैं हिंदुस्तानी,
खट्टी-मीठी जिनकी वाणी
राष्ट्र नाम पर एक हैं हम
आपस में कॉलर तानी
हाथ में घिस कर "आमलाल"
बाँट रहे थे खैनी
आज़ादी की बात छिड़ी
और बात गई पुष्तैनी
आज को सबने गाली दी,
कल की कुछ-कुछ ठानी
गए मैच की बात करी,
कि चोर हैं पाकिस्तानी
युद्ध चल रहा सीमा पर,
कुछ खून भी था रोमानी
कुछ ने कपड़े दान किये,
कुछ ने चोकर धानी
भाभी ने आवाज़ लगाई
नहीं है बिजली पानी
गुस्से से फिर लाल हुए,
आमलाल बईमानी
सत्ता का ये दोष है सारा,
टैक्स लगे फरमानी
चारा खाते, तोप में खाते,
क्यों कफ़न चोर - हैरानी
तार बदल कर लंगर डाला
घर में बिजली तानी
पानी चोरी करने को
बढ़ चले "आम बईमानी"
रुचि शुक्ला
No comments:
Post a Comment