ख़ुशी
ये आप निवेशित ज़िंदग
प्रश्न पूछती हर घड़ी
कब क्या कैसे करोगी
क्या किया है अब तलक
कदम-कदम पर मोड़ मिले हैं
हर मोड़ पर मिली चुनौती
जीवन है ये कुरुक्षेत्र
तप युद्ध इंद्रिय जहाँ सदा
स्वर्ग-नर्क, सुख-दुख के संग
नौ रसों से बना जहाँ
बुरा नहीं है पर फिर भी
हर मन में है, बस ख़ौफ़ यही
हल इसका है कठिन नहीं
बस एक प्रयास की बात यहीं
अभिलाषा कर ख़ुशी की मन में
हंसी का कोई बहाना ढूँढो
है युद्ध ज़िंदगी जीतना तुमको
अपने अंतर मन से बोलो।
रुचि शुक्ला
No comments:
Post a Comment