यह फितरत है
भीड़ में रह कर भी न गुम होना
ऐसी ही फितरत से चलना है सीखा
लक्ष्यों की खोज का नहीं ये सफर है
मुझे है पता मुझे क्या है पाना
हुई कोशिशें कई रोकने की
कदम मोड़ने की, विश्वाश तोड़ने की
अटल हूँ , कभी न पीछे मुडूंगी
कदम दर कदम मैं आगे बढ़ूंगी
मानस पर अपने कावू है मेरा
कर्मों पर अपने मुझे है भरोसा
तूफानों का दौर चलता रहेगा
उन्हें मोड़ने का अभ्यास है मेरा
मुझे अपने खुद को नहीं खोजना है
स्व साबित होकर, न जहाँ को दिखाना
मेरी नजर में, है मेरी मंज़िल
मेहनत लगन से जिसको है पाना ।
रुचि शुक्ला
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