आशा
मैं चली डगर पर कूदती फाँदती
हवाओं को वेग से चीरती काटती
हँसती खिलखिलाती
संग चिड़ियों के चहचहाती
फूलों की भांति खुशबू अरुणाती
किरणें भी मुझको छूते शरमाती
ताजगी पानी के झरने सी मुझमे
अल्हड़ता मुझमें, धीरज भी मुझमें
सूरज को छूने की हिम्मत है मुझमें
सुंदरता मुझमे, आभा है मुझमें
कारण है इसका, आशा है मुझमें
आगे बढूं ये, ख्वाहिश है मुझमें ।
रुचि शुक्ला
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