अपने को पहचानो
सफर में सफर तो करते है रहना
हर मुश्किल में तुमको हँसकर है रहना
जीत निश्चित है तुझको, कोशिश है करना
बस में है तेरे, तेरा साथ केवल
साहस लगन से, चलते तू रहना
भरोसा है तुझको, अपने पर जितना
एक रोज़ होगा, ज़माने को उतना
शोर में तू एक, मीठी ध्वनि है
संवेदन की तू, मूरत भली है
सपनों से तेरी, आँखें सजी हैं
तेजस्व तुझमें, साँस लपटों भरी है
तुझे आज अपना जीना है ऐसे
स्वर्णिम इति ये, बन जाए जैसे ।
रुचि शुक्ला
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