जीने का अंदाज
विगत कल को याद बनाया
अगमित कल को सपना अपना
आज में शामिल कर इनको
अंदाज बनाया जीने का अपना
बचपन से उमंगें माँगी
और बुढापे से अनुभव
यौवन में शामिल कर इनको
नव जीवन का किया उदभव
धरती को आधार बनाया
आसमाँ को आँचल अपना
मूल्यों में शामिल कर इनको
आदर्श बनाया जीने का अपना।
रूचि शुक्ला
No comments:
Post a Comment